एक सुहाना सफर

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काफिया-ना रदीफ़-सफर

*** एक सुहाना सफर ***
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जीवन प्यारा सुहाना सफर,
दीवाना सा मस्ताना सफर।

कटती ही ना अकेले कभी,
साथी बिन हो विराना सफर।

चलने से राह आसान हो,
थम जाए ना मुहाना सफर।

मिलती रहती सदा ठोकरें,
धूमिल होता जुहाना सफर।

यारों से गर डगर हो भरी
बन जाता है ठिकाना सफर।

पथ पर कोई नहीं कष्ट हो,
नजरों का हो निशाना सफर।

मनसीरत गर अकेला रहे,
बन जाती राह थाना सफर।
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सुखविंद्र सिंह मनसीरत
खेड़ी राओ वाली (कैथल)

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सुखविंद्र सिंह मनसीरत कार्यरत ःःअंग्रेजी प्रवक्ता, हरियाणा शिक्षा विभाग शैक्षिक योग्यता ःःःःM.A.English,B.Ed व्यवसाय ःःअध्ययन अध्यापन... View full profile
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