"एक सुबह मेघालय की"

???????????
व्यथित मन के झरोखों से,
घुटन तिल तिल के छटती है।
यामिनी तम से काली हो,
मगर पल पल पे छटती है।
उषा की ज्योति की लाली,
अरुण रक्तिम कपोलों पर ।
सुनहरी धूप बनकर के ,
सुबह देखो बरसती है।।

??????????

कुहुक पंक्षी चहक चिड़ियां,
खुसी के गीत गाते हैं ।
पुष्प गुच्छों से गुम्फित हो,
लताएं लहलहाती हैं ।
उषा की सोख कलियों पर,
भ्रमर गुंजन बिखरता है ।
रूप की धूप में सजकर,
प्रकृति कण-कण संजोती है ।।

??????????

कुमुदिनी थक के सोती है,
कमल सोकर के जगता है ।
चंदनी वायु का झोंका,
जहां स्पर्श होता है ।
प्रभा की किरणों से रंजित,
सुलभ ब्रह्मांड होता है ।
अरुण के साथ दिनकर का,
तभी आगाज़ होता है।।

??????????

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like Comment 0
Views 59

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share