एक सवाल बनकर

ऐसा न हो भीड़ में खो जाए हम
कुछ पल चले
और ठहर जाएं हम
बिखर न जाएं कही ख्वाब बनकर
जी रहे है हम
एक सवाल बनकर

शायद कुछ खास करने की तमन्ना है
शायद एक चाँद बनने की तमन्ना है
रह न जाए ये तम्मना खाक बनकर
जी रहे है हम
एक सवाल बनकर

छूट न जाए वक्त का साया कही
टूट न जाए उम्मीदों की कड़ी
बाह न जाए ये मुस्कान
एक जल प्रपात बनकर
जी रहे है हम
एक सवाल बनकर

– सोनिका मिश्रा

Do you want to publish your book?

Sahityapedia's Book Publishing Package only in ₹ 9,990/-

  • Premium Quality
  • 50 Author copies
  • Sale on Amazon, Flipkart etc.
  • Monthly royalty payments

Click this link to know more- https://publish.sahityapedia.com/pricing

Whatsapp or call us at 9618066119
(Monday to Saturday, 9 AM to 9 PM)

*This is a limited time offer. GST extra.

Like 1 Comment 0
Views 209

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share
Sahityapedia Publishing