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एक शिकायत खुद से …. (ग़ज़ल)

Onika Setia

Onika Setia

गज़ल/गीतिका

October 12, 2017

ज़माने को शिकायत है हमसे ,
और हमें शिकायत है खुद ही से .

क्या ज़रूरत थी इस जहां में हमारी?
जिंदगी ने भी सवाल खड़े किये हमसे .

गिरगिट सी अदा हम न सीख सके ,
कोई रिश्ता न बना सके झूठ औ फरेब से.

हम थे नादाँ ,वक़्त का इशारा न समझ सके,
बदल रहा था ज़माना और हम रहे बेगाने से.

चेहरों को पढने ,दिलों को टटोलने की कोशिश ,
क्या फायदा हुआ ? कहलाये हम ही दीवाने से.

पत्थरों सी दुनियां में शीशे सा दिल लिए चलना,
टूटना तो टूट कर ही रहा ,कब तक बचाते वारों से.

खता तो हुई है हमीं से ,तो शिकायत किस्से कीजिये?
हमारे गुनाहों को बक्श दो,अर्ज़ करते है हम खुदा से.

Author
Onika Setia
नाम -- सौ .ओनिका सेतिआ "अनु' आयु -- ४७ वर्ष , शिक्षा -- स्नातकोत्तर। विधा -- ग़ज़ल, कविता , लेख , शेर ,मुक्तक, लघु-कथा , कहानी इत्यादि . संप्रति- फेसबुक , लिंक्ड-इन , दैनिक जागरण का जागरण -जंक्शन ब्लॉग, स्वयं... Read more
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