एक शिकायत खुदा से .... ( गजल )

ज़माने को तो शिकायत है हमसे ,
और हमें शिकायत है खुदा तुम से ।
क्या ज़रूरत थी हमें यहाँ लाने की,
रहे सब नज़ारे इस जहां के बेगाने से ।
यह रंग बदलती झूठी ,फरेबी दुनिया ,
हर रिश्तों के चेहरों पर नकाब दोहरे से ।
हम रहे नादां ,न आई हमें दुनियादारी ,
दिल से हम सोचते थे औ वो दिमाग से ।
नाज़ुक सा दिल और यह जहां पत्थर ,
चकनाचूर हुआ बेचारा,ना रहे निशान से ।
हम तो बाज़ आए ,देखो रूह भी घायल है ,
अब निजात दिला दे ‘अनु’ को इस जहां से ,

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like 1 Comment 0
Views 26

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share