एक वर्ष आज फिर बीत गया

एक वर्ष आज फिर बीत गया

एक वर्ष आज फिर बीत गया
एक वर्ष आज और बीत गया
काफी कुछ पा लिया हमने
पर, कितना कुछ पीछे छूट गया

एक वर्ष आज और बीत गया…..1

बैठेंगे जो आज शाम को, तब यह बात सोचेंगे
प्रश्न है यह बहुत बड़ा,आराम से हल खोजेंगें

याद करेंगे इस वर्ष में
क्या खोया और क्या पाया
याद करेंगे इस वर्ष ने
हमको क्या है सिखलाया

याद करेंगे कितने झूठों को
निज हित में हमने अपनाया
याद करेंगे कितने सच को
निज हित में है झुठलाया

सोचेंगें जो निर्भर था औरों पर
वो तन्हा चलना क्यों सीख गया……2

याद करेंगे शुरुआत में,
खुद से किए वादों को
याद करेंगे कसमों को,
सच्चाई के इरादों को

याद करेंगे कब-कब हमने
औरों के दिल पर चोट की
और याद करेंगे कब हमारे
मन में मैली खोट थी

याद करेंगे संग चलने वाला
हर साथी क्यों पीछे छूट गया……3

चलो पुरानी बात भूलाकर
एक दूजे से हाथ मिलाकर
चलो यार अब गले मिले हम
पिछली सारी बात भुलाकर

कामयाबी को ध्येय बनाकर
और नाकामी को अपनाकर
फिर नई हम राह चलें
आँखों में कुछ ख्वाब गढें

चलो निराशा के आंगन को दें
हम उम्मीदों का एक दिया……4

चलो साथ में मिलकर के
हम एक कसम उठाएंगे
जो गलती अब की बार करी
वह आगे न दोहराएंगे

खुद से करेंगे जो भी वादा
वो वादा न हम तोड़ेंगे
सच्चाई के पथ पर
चलना न हम छोड़ेंगे.

नये वर्ष के स्वागत में गाएँ
उमंग भरा हम गीत नया…….5

एक वर्ष आज फिर बीत गया
एक वर्ष आज और बीत गय

काफी कुछ पा लिया हमने
|| पर, कितना कुछ पीछे छूट गया ||

कवि-
भवानी प्रताप सिंह ठाकुर
भोपल म.प्र.
सम्पर्क – 8989100111
thakurbhawani66@gmail.com

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