Aug 17, 2016 · कविता
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एक लम्हें में जिंदगी समेट लिया,,,

एक लम्हें में जिंदगी समेट लिया है
भर के बाहों में तुम्हें
एक अधूरा ख़्वाब सच कर लिया है
पाकर जिंदगी में तुम्हे

मेरा हर रास्ता गुजरने लगा है
जिंदगी से तेरे
मेरा हर ख्याब संवरने लगा है
मिलने से तेरे
हसरतों की फसल उगा लिया है
पाकर जिंदगी में तुम्हें
एक लम्हे में जिंदगी समेट लिया है
भर के बाँहों में तुम्हे,,,,

कुछ सोये अरमान मचलने लगे हैं
कुछ रोते लम्हे मुस्कराने लगे हैं
अंधेरी रात को भुला दिया है
पाकर जिंदगी में तुम्हें
एक लम्हे में जिंदगी समेट लिया है
भर के बाँहों में तुम्हें,,,
लक्ष्य@myprerna

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Lakshya thakur
Lakshya thakur
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मेरी रचनाएँ दिल से निकलती हैं जिनमें काव्यशिल्प से ज्यादा भावों का जोर होता है।यहाँ... View full profile
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