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एक रूमानीकविता

Vindhya Prakash Mishra

Vindhya Prakash Mishra

कविता

August 10, 2017

(एक रूमानीकविता )
होठों पर उसका नाम हुआ
जिसके लिए वह बदनाम हुआ
दिल भी जिसका गुलाम हुआ
वह समझ न पाये प्रिय प्रीत
न्यौछावर उसपर सुबह शाम हुआ
जिसकी पूजा करने से ही
जगह पवित्र धाम हुआ
वह समझ न पायी प्रिय प्रीत
जिसके लिए वह बदनाम हुआ
सम्पर्पित होकर अपनो पर
देखता है तस्वीरो पर
वह पागल आठो याम हुआ
वह समझ न पाये प्रिय प्रीत
जिसके लिए वह बदनाम हुआ

विन्ध्यप्रकाश मिश्र विप्र

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Author
Vindhya Prakash Mishra
विन्ध्यप्रकाश मिश्र विप्र साहित्य सृजन में रूचि रखता हूँ । चिंतनशील जीव होने के कारण कुछ न कुछ सृजित करता हूँ । पर वीणापाणि माँ की कृपा दृष्टि के बिना सम्भव नहीं है । एक साधना के रूप में मनन... Read more
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