Oct 10, 2016 · कविता

एक रावण मरता सौ तैयार है...

आज के रावण को भी नहीं मिलता
वो राम है
जो दे रावण से मुक्ति,
आज के रावण का काम तमाम
रावण के ही हाथ है,
एक रावण मरता
सौ तैयार है,
राम राज्य तो बस सपना है
हर तरफ रावण राज है,
न मरता रावण
न मिलता वो राम है
इसलिए जिन्दा रावण राज है
उस रावण की भी कुछ मर्यादा थी
भगवान राम से ही उसकी मुक्ति थी,
आज रावण अमर्यादित ही नही
काफी गिरा है,
रावण के प्राण हरने को
सामने रावण ही खड़ा है,
एक रावण मरता है
सौ तैयार है,
राम राज्य तो बस सपना है
हर तरफ रावण राज है,
राम तू जाने कहाँ बसा है
शायद तू हमसे खफा है,
भुला दिया हमने तुझको राम
भूले तेरे महान काम,
कैसे आये राम राज्य
कैसे पैदा हो फिर राम
कैसे पैदा हो फिर राम।।

*****दिनेश शर्मा*****

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सब रस लेखनी*** जब मन चाहा कुछ लिख देते है, रह जाती है कमियाँ नजरअंदाज...
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