एक मुलाकात

अनजान रास्ते और एक मुलाकात ।
दो पल की बाते और जन्मों का साथ ।।
बने होंगे ऐसे भी रिश्ते जो इस क़दर मिले होंगे ।
किसी डगर पर दोनों अजनबी ही रहे होंगे ।।
सफर घंटो का जन्मों के लिए बांधा होगा ।
बहुतों को इस रिश्ते से ऐतराज़ भी रहा होगा ।।
पर मिटा दि होगी । वक्त ने ऐतराज़ की सभी लकीरें ।
खिला उठा होंगा वो रिश्ता फिर से उस आंगन में ।।
कुछ खट्टी मीठी यादों के किस्से फिर से उस आंगन में चहकने लगे होंगे ।
बूढ़ी दादी की बातें अब फिर से सुनाई देने लगी होंगी।
पापा के ऑर्डर अब फिर से जाग गए होंगे ।
पड़ोसियों ने भी अब चुप्पी साध ली होंगी
हा… पर वक्त तो लगा ही होगा ।
सब ठीक करने में ।
पर बहुत कुछ बदल जाता है ठीक करने में ।।
पर पहली वाली बात अब कहा रही ।।

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