एक महकती बेटी हो

आधार छंद – लौकिक अनाम, 22 मात्राभार
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फूलों जैसी एक महकती बेटी हो ।
चन्दा जैसी एक चमकती बेटी हो ।

स्वर्ग बनेगा निश्चित, जो घर में यारों ,
कोयल जैसी एक चहकती बेटी हो ।

दादा बच्चे बन जाते हैं जिस घर में ,
चिड़िया जैसी एक फ़ुदकती बेटी हो ।

लोरी गाती कब थकती बूढी दादी ,
जो गोदी में एक सुबकती बेटी हो ।

दुनिया के हर घर की सुन्दर बगिया में ,
गुड़िया जैसी एक मटकती बेटी हो ।

घर-आँगन सब नाच उठेगा यदि कोई ,
पायल पहने एक छमकती बेटी हो ।

खुशियों की बारात सदा ही आएगी ,
जिस घर यारों एक थिरकती बेटी हो ।

ईश्वर से मैं नित्य दुआ ये मांगूगा ,
सबके घर में एक दमकती बेटी हो ।

खुशहाली ‘अनजान’ वहां छा जायेगी ,
आँगन में जो एक ठुमकती बेटी हो ।

अरविन्द उनियाल, ‘अनजान’, उत्तराखंड ।

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Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "बेटियाँ"

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