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एक बार बता तो आखिर बात क्या है ?

kapil Jain

kapil Jain

कविता

November 30, 2016

एक बार बता तो आखिर बात क्या है ?
खफा होना तो हक़ है तेरा,
मगर ये बेवजह बेरुखी कि बुनियाद क्या है ?
एक बार बता तो आखिर बात क्या है ?

काफिले जज़्बात दफ़न है दिल में तेरे,
उभर आते हैं बार बार आँसू बनके ,
ये आँखों में तेरी छुपे हुए राज क्या है.?
एक बार बता तो आखिर बात क्या है ??

तेरी ख़ामोशी भी है सजा मेरे लिये,
आखिर इस सजा का निजात क्या है ?
एक बार बता तो आखिर बात क्या है?

**##@@कपिल जैन @@##**

Author
kapil Jain
नाम:कपिल जैन -भोपाल मध्य प्रदेश जन्म : 2 मई 1989 शिक्षा: B.B.A E-mail:-kapil46220@gmail.com
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