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* एक बहिन की पीड़ा *

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

कविता

February 6, 2017

यह कविता नहीं है एक बहन की पीड़ा है ********************************
राखी की पूर्व सन्ध्या पर स्मरण दिलवाने के वास्ते ताकि नहीं हो भाई-बहिन के अलग- अलग रास्ते
*************************
आज राखी है
फिर भी कुछ
बहनों के दिल
में तन्हाई है
क्या
भारतीय संस्कृति
बिकती जा रही है
क्या त्योंहार की महिमा
टिक नहीं पायी है
हाल बतला न पाती है
बहन ना चाहती है दौलत
और गहने
भाई बहिन का प्यार
कहीं आज
हो गया दरकिनार
होता था कभी
इस धागे से इतना प्यार
आज कहां खो गया
आपस का वो प्यार
आज राखी है फिर भी
कहां अपने दिल को
बहना रख पाई है ।।
?मधुप बैरागी

Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि... Read more
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