Jan 2, 2017 · कविता
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एक पथ और

आओ चले एक पथ और
छोड़ पदचिन्ह एक छोर !
नई उमंग ह्रदय धरे भोर
कनखियों में ख़ुशी का शोर !
आओ चले एक पथ और !!

चलना ही जीवन की नियति है
चलो अपने मंजिल पथ कि और ।
मिट जायेगा दुःख का अंधियारा
खिल उठेगी सफलता की भोर ।।

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डी के निवातिया ____!!!

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डी. के. निवातिया
डी. के. निवातिया
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नाम: डी. के. निवातिया पिता का नाम : श्री जयप्रकाश जन्म स्थान : मेरठ ,... View full profile
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