एक नसीहत चंद लोगों के नाम

“जो लोग समझते हैं देश मेरा ,
रहने के लायक नहीं रहा
उनके लिए मेरे पास ,
छोटी मोटी दो चार सलाह !
कहते तो तुम बिलकुल ठीक ही हो ,
सहिषुणता रह गयी कहाँ ?
वरना याकूब मेनन के जनाजे में ,
रोता क्यों जान सैलाब वहां ?
तस्लीमा नसरीन जैसों को ,
क्यों मिल जाता हैं संरक्षण यहाँ ?
कहना तो तुम्हारा ठीक ही है
सहिषुण्ता रह गयी कहाँ ?
जहाँ मंदिर मस्जिद सब आस पास ,
पूजा नमाज सब एक साथ
गीता कुरान सब पाक जहाँ ,
वहां सहिषुण्ता रह गयी कहाँ ?
जरा सीमा पर जाकर पूछो जवान से ,
क्या मिलता है उनको देश प्रेम से ?
क्यों करते हैं रक्षा वो देश की ?
जब सहिषुण्ता रह गयी नहीं ?
अरे क्या फर्क है तुममे और अंग्रेजों में ?
वो देश लूटने अाये थे , तुम देश बांटते आये हो ,
जाती धर्म के नाम पर दीवार बनाते अाये हो !
अफजल जैसे आतंकी के लिए ,
जहाँ तुम नाक रगड़ने आते हो ,
जहाँ मणि शंकर जैसे मंत्री जी ,
पाक में रोने जाते हैं !!!
इतने पर भी हम भारतवासी
सहिषुण्ता दिखलाते हैं !!
वरना तुम जैसे गद्द्दारों को तो
सीमा से पार भगाना था !
भारत से सीधे तुमको तालिबान पहुँचाना था !!!”

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