कविता · Reading time: 1 minute

एक नया भारत बनाना है

एक नया भारत बनाना है लेकिन जरा हौले हौले,
उनको भी सबक सिखाना है लेकिन जरा हौले हौले।
लूट लिया मेरे हिन्द को देश के गद्दारों ने,
खा लिया सब कुछ नोचकर इन्ही सिपहसालारों ने,
अब बस, अब बस
अब एक् नया पाठ पढ़ाना है लेकिन जरा हौले हौले
इक नया भारत बनाना है लेकिन जरा हौले हौले

कही लाखो के तो कही करोडों के घोटाले हुए,
कोई इससे भी अधिक के था अरमाँ पाले हुए,
हम तो जीरो की कीमत भी भूल गए थे,
इनके घोटालो ने याद दिलाई लेकिन जरा हौले हौले,
अब जीरो का मोल ही बताना है लेकिन ज़रा हौले हौले।
अब एक् नया भारत बनाना है लेकिन ज़रा हौले हौले।
‘जोशी’अब ये बेड़िया तोड़ देने को मन करता है,
हर दिन एक् नया घोटाला हर बार अखरता है,
इक नया अरमाँ दिल में जागने लगा है अभी ,
बस उसी अरमाँ को हर दिल में जगाना है लेकिन जरा हौले हौले,
अब एक् नया भारत बनाना है लेकिन जरा हौले हौले

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