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एक था जंगल ...

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एक था जंगल ।
था चल रहा जहाँ दंगल।।
हाथी सारे जज बने थे।
बंदर बना हुआ था पहलवान ।।
होने को थी ही दंगल की अब शुरुआत ।
इतने में ही आ गयी वहाँ पर शेर की बारात।।
आते ही वह जोर से लगा दहाड़ने।
हाथी भी था यह देख चिंघाड़ने ।।
अब लग रहा था यह दंगल लड़ेंगे सारे हाथी ।
और प्रतिद्वंद्वीं होंगे सारे शेर के बाराती ।।
इतने में ही आ गयी कहीं से एक लोमड़ी वहाँ पर।
आते ही वह शेर से बोली दुल्हे राजा कर दो थोड़ी दया इन पर।।
दुल्हा राजा जोर से बोला अब दया -क्षमा कुछ न होगा ।
अब तो दंगल यह हर हाल में होगा और बाद में कुछ होगा ।। था जंगल ….
एक था जंगल ।
था चल रहा जहाँ दंगल।।
हाथी सारे जज बने थे।
बंदर बना हुआ था पहलवान ।।
होने को थी ही दंगल की अब शुरुआत ।
इतने में ही आ गयी वहाँ पर शेर की बारात।।
आते ही वह जोर से लगा दहाड़ने।
हाथी भी था यह देख चिंघाड़ने ।।
अब लग रहा था यह दंगल लड़ेंगे सारे हाथी ।
और प्रतिद्वंद्वीं होंगे सारे शेर के बाराती ।।
इतने में ही आ गयी कहीं से एक लोमड़ी वहाँ पर।
आते ही वह शेर से बोली दुल्हे राजा कर दो थोड़ी दया इन पर।।
दुल्हा राजा जोर से बोला अब दया -क्षमा कुछ न होगा ।
अब तो दंगल यह हर हाल में होगा और बाद में कुछ होगा ।।

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Bharat Bhushan Pathak
Bharat Bhushan Pathak
DUMKA
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कविताएं मेरी प्रेरणा हैं साथ ही मैं इन्टरनेशनल स्कूल अाॅफ दुमका ,शाखा -_सरैयाहाट में अध्यापन...