कविता · Reading time: 1 minute

एक तमन्ना जीने की

एक दीये की
एक तमन्ना जलने की
दीये की बाती की चाहत
तेल के तरल पदार्थ में
भर भर भीग जाने की
उसे खुद में सोखते रहने की
उसमें डूबे रहने की
दीये को प्रकाश की
ऊर्जा का प्रवाह देते रहने की
मिट्टी के दीये के
अपने घर में
प्रकाश उत्सव मनाते
रहने की
खुद के संग संग
सर्वस्व व्याप्त अंधेरे के
बुझे हुए दीये
फिर से
जलाने की
इस दुनिया में
जिसने जन्म लिया
जिसने एक बार
सांस भरी
वह आखिरी सांस तक
आखिर क्यों नहीं चाहेगा
जीना
हर जीवन की आखिरकार
होती ही है
एक तमन्ना जीने की।

मीनल
सुपुत्री श्री प्रमोद कुमार
इंडियन डाईकास्टिंग इंडस्ट्रीज
सासनी गेट, आगरा रोड
अलीगढ़ (उ.प्र.) – 202001

1 Like · 1 Comment · 122 Views
Like
447 Posts · 30.8k Views
You may also like:
Loading...