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एक टीस

छोड़ आया हूँ गाँव
ज़िन्दगी की ख़्वाहिशों को
पूरा करने के लिए,
धँस गया हूँ पूरी तरह
शहर की भीड़-भाड़ में!
नहीं सुन पाता हूँ अब
रूह की छटपटाहट
और घुटन की सिसकती आह
इन सपनों के आगे!

बहुत सलता है
घर-परिवार से दूर होकर
यहाँ अकेलेपन को
गले लगाना!
और एक टीस बार-बार
उठती है मन में,
कि क्यों कुछ पाने के लिए
कभी-कभी
इतना कुछ खोना पड़ता है?

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करन 'मस्ताना'
करन 'मस्ताना'
Daltonganj, झारखण्ड
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(Poet/Lyricist/Writer) MEMBER OF :- The Poetry Society of India.