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*एक झलक प्रेम को सब तरसे !

Dr. Mahender Singh

Dr. Mahender Singh

कविता

November 7, 2017

*घबराहट में यूँ न शर्माना,
जमाने की नज़र बड़ी जालिम है,
*हर हरकत पर नज़र रखती है,
तकरार में थोड़ा ज्यादा,
शर्माने की हरकतों पर
हर अंदाज़ में गवाही बनती है,
*जुर्म है प्यार*
जमाने की नज़र में,
पहले जान लेते है,
फिर फूल “उनकी याद” में अर्पित करते है,
*एक झलक प्रेम को महेंद्र तरसे,

Author
Dr. Mahender Singh
(आयुर्वेदाचार्य) शौक कविता, व्यंग्य, शेर, हास्य, आलोचक लेख लिखना,अध्यात्म की ओर !
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