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एक जवान की पीढ़ा

ज़ैद बलियावी

ज़ैद बलियावी

कविता

April 27, 2017

काटा जो सर दुश्मन ने,
तो जीते थे हम शान से,,
अपनो से जो सिला मिला,
फिर जीना पड़ा अपमान से,,
जिनकी सुरच्छा को सीमा पर,
हम लड़ते अपनी जान पर,,
पड़ा तमाचा मेरे उन,
जीते-जागते अरमान पर,,
होली-ईद छोड़ी हमने,
जिनकी रक्षा के नाम पर,,
सारा मान छोड़ा उन्होंने,
लाकर के अपमान पर,,
मेरी मौत की खबरों पर,
शोक मनाते देश मे,,
न मिली मुझको हमदर्दी,
जीते जागते भेश मे,,

जय हिन्द,जय भारत

(((((ज़ैद बलियावी)))))

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Author
ज़ैद बलियावी
नाम :- ज़ैद बलियावी पता :- ग्राम- बिठुआ, पोस्ट- बेल्थरा रोड, ज़िला- बलिया (उत्तर प्रदेश). लेखन :- ग़ज़ल, कविता , शायरी, गीत! शिक्षण:- एम.काम.

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