एक चिड़िया आई

आई रे आई एक चिड़िया आई,
मधुर स्वर में गीत सुनाई।
सब के दिलों पर छा गई,
सब की बेचैनी बढ़ा गई।।

आई तो लेकर मौसम सुहाना,
कर गई हम सबको दीवाना।
होत सुबह उनको था जाना,
पर किसी ने नहीं उनको पहचाना।।

देखा के अपने हुस्न की कला,
खोल दी सबकी जेबों की ताला।
ये तो पड़ी सबके पाला,
पर किसी का न हुआ भाला।।

बनके आई पवन का झोंका,
दे गई वह सब को धोखा।
जैसे आसमां में पनसोखा,
नदी के जल को सोखा।।

पल-पल में रंग बदलती,
सब को लेकर संघ चलती।
न जाने वो कब फिर मिलेगी,
हम सबके नींदों को हरेगी।।

सच्ची लगन कहानी है,
सब की नजरानी है।
दिल की एक लगानी है,
सबको ए दे जानी है।।

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