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एक गज़ल

श्रीकृष्ण शुक्ल

श्रीकृष्ण शुक्ल

गज़ल/गीतिका

February 12, 2018

हालात से लड़ा है वो दिखता थका थका
चलता ही जा रहा है वो लेकिन झुका झुका

वो शख्स शक्ल से भी तो दिखता लुटा लुटा
तकदीर से पिटा है वो फिर भी डटा डटा

इस दौर में गरीब कहीं का नहीं रहा
बेबस खड़ा हुआ है वो दिखता पिटा पिटा

हर जंग हारने से बड़ा टूटता गया
मायूस दिख रहा है वो हर दम घुटा घुटा

सरकार के बजट का ये अंजाम देखिए
हर शख्स आज लग रहा बेहद खफा खफा

घर में नहीं है कोई तिजोरी मेरे यहाँ
बैठक में तख्त ही पड़ा वो भी ढका ढका

वो चोर था अजीब मेरे घर में जा घुसा
बैठा है जैसे वो भी हो कोई लुटा लुटा

ये कृष्ण आज और पे इल्जाम क्या धरे
घर के चिराग से ही है ये तो जला जला

श्रीकृष्ण शुक्ल, मुरादाबाद

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Author
श्रीकृष्ण शुक्ल
From: मुरादाबाद (उ प्र)
सहजयोग, प्रचार, स्वांतःसुखाय लेखक, कवि एवं विश्लेषक.
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