कविता · Reading time: 1 minute

एक गिलहरी देखा मैने

रेत के टीले में लोट लगाकर
सागर जल में खुद को धोती थी
ऐसा वो क्यों बार-बार करती थी
देख इसे मन ही मन सोचा मैने

एक गिलहरी देखा मैने

तब निश्चय किया कि इसे
क्या पीड़ा है , पूछ तो लू
इसकी हृदय वेदना सून तो लू
कर निश्चय फिर पूछा मैने

एक गिलहरी देखा मैने

गिलहरी ने कहा प्रभु श्री राम से
आप लंका चले है धर्मरक्षा के काम से
मौन रहकर यू ही मै शांत नही बैठुंगी
सहयोग करुंगी,सागर में रेत भरने सोचा मैने

एक गिलहरी देखा मैने

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नाम हरिनारायण साहू है और तनहा के तकल्लुस से लिखते हैं | कम्प्यूटर इंजीनियरींग में बैचलर आफ इंजीनियरिंग के छात्र हैं | कविता , गजल , गीत , दोहा ,…
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