मुक्तक · Reading time: 1 minute

एक खुमार सा छाया, लहर फूटने लगी

उन्होंने हमारी शान में दो बोल क्या कहे,
एक खुमार सा छाया, लहर फूटने लगी।
हम ख्वाबों और ख्यालों में झूमने लगे,
होश आया तब ये पाया, ज़मीं छूटने लगी।

————-शैंकी भाटिया
अक्टूबर 5, 2016

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