Jul 12, 2016 · कविता

? ग़ज़ल-१ ?

एक खयाल ……
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कौन गया यूँ आकर मुझमें;
इत्र निरा फैलाकर मुझमें..!!
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रस्ता भूल न जाये कोई ;
रख दो दीप जलाकर मुझमें..!!
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सहरा हूँ पर आज विकल हूँ;
बरसाओ जल आकर मुझमें..!!
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ल जैसा कोई तो हो;
मोम रखो पिघलाकर मुझमें..!!
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खंडर हूँ बस यादों का मैं
कौन बसेगा आकर मुझमें..!!
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गूँज रहा है गीत अभी तक ;
छोड़ गये तुम गाकर मुझमें..!!
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आने की पाती रख जाओ;
दिन तारीख बताकर मुझमें..!!
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?अर्चना पाठक “अर्चिता”?
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