एक खत मेरे प्यार के नाम

हां सही में देखो अब
वक्त बदलने सा लगा है
हां अब जिंदगी बदलाव का रूप लेने लगी हैं
मेरे जीवन का सूरज भी ढलने सा लगा हैं

आंखों में वही तेज है प्रीत भी तो देखो वही हैं
अब अपने काम की गति अब कम सी होने लगी हैं
मेरे चश्मों का नंबर अब जल्दी जल्दी बदलने लगा है
मुझे बिन कहे अब तुम भी समझने लगे हो

जो भी समय पर बन जाये अब खाने लगे हो
अब मुस्कुराकर अपने काम भी करने लगे हो
मेरा हाथ भी अब कुछ कामो में बटाने लगे हो
अब चलती हूँ धीरे बाजार में तो तुम रुकने लगे हो मेरे लिए

हर हाल में अब साथ तुम निभाने लगे हो ।
किसी रोज तुमसे बिछड़ने का डर,मुझे सताता हैं अब
मुझको डर लगने लगा था क्योंकि,हिम्मत नही है अब
मेरे तो जीवन का सूरज ढलने लगा हैं अब।

परिवार ओर बच्चों को संभाला साथ मिलकर
अब तक साथ निभाया हम दोनों ने एक दूजे का
साथ ही ले जाना हम दोनों को उस लोक
हे ईश्वर,हे ईश्वर मेरे ईश्वर।

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पुस्तकालयाध्यक्ष ग़ाज़ियाबाद में पिछले 22 वर्षों से पब्लिक स्कूल में कार्यरत। लेखन- साहित्य रचना एवं...
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