.
Skip to content

एक कैरिबियाई रात

Mahendra singh kiroula

Mahendra singh kiroula

कविता

January 23, 2017

एक रात महासागर किनारे,
प्रसिद्ध चिंचिलाद के द्वारे,
मनोरंजन , सोमरस मे लिप्त,
भीड़ मे हम और हमारे.

मदिरा का अनियंत्रीत पान,
और कुछ भी अधरों से बखान,
कैरिबियाई त्यौहार सा नृत्य,
मित्र का वहां था ध्यान.

अमेरिकन गुड़िया का मन,
न होश , न लिहाज़ और न कोई संतुलन.
कभी कोई कभी कोई,
और एक उसका दुश्मन.

वो गिरने को हुआ रेत पर
यु रात ने बदली करवट
देखा ये कह दिया
“यू टू बिग फॉर हिम ” सरपट

इतने मे सब कांच सा टूटा
सखी का ज्वालामुखी यु फूटा
तितर बितर , सब हुआ वहा से,
और हमारा मित्र भी रूठा.

ये मदिरा क्यों हाथ बढ़ाये,
क्यों ये अपने पीछे आये
नहीं चाहिए इसका साथ .
कह दो जहा जाना इसको जाए.

Author
Recommended Posts
एक बात है दिल में
एक बात है दिल में एक गहरी सी रात है दिल में, तुमसे कहनी थी, एक बात है दिल में , कभी कभी करवट लेकर... Read more
उस रात
उस रात तुमने लिखा था उस रात खींचकर मेरा हाथ बना उंगली कलम से प्यार नाम तुमने फ़ासला था हममें उस रात चारों ओर नीरवता... Read more
जीवन की परिभाषा
कवि संजय गुप्ता कभी सजना कभी संवरना, कभी मायूस हो जाना। कभी धूप की तपिश, सुनहरे सपनों की आशा। यही तो है जीवन की परिभाषा।।... Read more
मुक्तक
जब तेरी नजरों से मुलाकात होती है! चाहत की दिल से रूबरू बात होती है! यादों का तूफान कभी रुकता नहीं मगर, तन्हाइयों के आलम... Read more