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एक कहानी हो

सतीश चोपड़ा

सतीश चोपड़ा

कविता

February 27, 2017

मैं चाहता हूँ
तेरी मेरी
सिर्फ तेरी मेरी
एक कहानी हो
चाहे सिर्फ एक ही हो
पर हो तेरी मेरी
जिसमे वो ना हो
जिसमे इंकार ना हो
जिसमे जिंदगी सा लम्बा इंतजार ना हो
मेरे शिवा उसमें कोई शुमार ना हो
और तुझे भी मेरी तरह मुझपे एतबार हो
ना हो तो बस तेरा इंकार
हो अगर इंकार भी
तो वो हो मुझसे कभी जुदा होने से इंकार
तो वो हो मेरे दिल से मेरी सांसो से जाने से इंकार
तो वो हो मेरे सिवा किसी को दिल में बसाने से इंकार
हकीकत में ना सही
सपनो में ही हो…..
पर एक कहानी हो
सिर्फ एक कहानी हो

मैं चाहता हूँ
तुझे ही देखूँ
तुझे ही सोचूं
खुद को तुझे सोंप दूँ
खुद को तुझपे लुटा दूँ
तुझे जिंदगी में खुशियों की जगह पाऊँ
तेरी नजरों में मेरा इंतजार पाऊँ
तेरी यादों में मदहोश हो जाऊं
अगर तुझसे दूर होने का ख्वाब भी आये
तुझे भूल जाने का ख्याल भी आये
आँखों में तेरी तस्वीर जो धुँधलाए
उससे पहले आँखे मेरी
हमेशा के लिए बंद हो जाएँ
तू न सही तेरा सपना तो साथ हो
सच ना हो चाहे भ्रम तो साथ हो
चाहे ये शौदा मेरी जिंदगी के साथ हो
पर एक कहानी हो
सिर्फ एक कहानी हो

मैं चाहता हूँ
मैं तेरे साथ हों
तू मेरे साथ हो
और हो पहाड़ों कि वादियों का आँचल
जिसमें बैठूं मैं तुम्हारे साथ जरा सटकर
और महसूस करें हम हवाओं की सनसनाहट को
उलझा जाये शरद हवा जब तेरी जुल्फों को
मैं सवारूँ उन्हें प्यार से
और तुम निहारो मुझे उन्हें संवारते हुए
मैं हवा से कुछ कहूं
और हवा तुमसे
और मैं समझूँ तुम्हें बिन कहे
बोलना चाहें जब होठ
तो रख कर उनपे ऊँगली उन्हें चुप कराऊं
पत्तो कि सरसराहट संगीत दे खामोश नगमों को
उन नग्मों में तेरी कहानी हो
पर एक कहानी हो
सिर्फ एक कहानी हो

मैं चाहता हूँ
कुछ तमन्नाएं हो
तेरे भी दिल में
मेरे भी दिन में
दूर पहाड़ी पर
घर हो एक सपनो का
जिसके आँगन में बैठ
तारों सजी रात में
तुम देखो सामने पहाड़ी पर
झिलमिलाती दुल्हन सी सजी नगरी को
और मैं कल्पना करूँ तुम्हारे दुल्हन रूप की
और खुद पर इतराऊँ
जो हो रात चांदनी
तुम देखो चाँद को
और मैं देखूं अपने चाँद को
जो कभी इतरा कर ढक लें घटाएँ अपने चाँद को
मैं हटा दूं जुल्फें
चेहरे से तुम्हारे
चकोर को भी चाहे फिर भ्रम हो
पर एक कहानी हो
सिर्फ एक कहानी हो

मैं चाहता हूँ
तेरी गोद में सर रखूं
तेरी जुल्फों से खेलूं
निहारूं तेरे चेहरे की चमक को
महसूस करूं तेरे बदन की खुशबू को
खुल के हंसूं तेरे साथ बैठ कर
और गुनगुनाऊँ तेरे साथ बैठ कर
भूल जाऊं ज़माने को तेरी पलकों में बैठ कर
तेरे मन में सिर्फ मेरी तस्वीर हो
तड़पे तू भी याद् में मेरी और चोट का बहाना हो
मैं लिखूं कविता तेरे लिए
और उस कविता में तेरी कहानी हो
पर एक कहानी हो
सिर्फ एक कहानी हो
पर एक कहानी हो
सिर्फ एक कहानी हो
सिर्फ तेरी मेरी
एक कहानी हो
मैं चाहता हूँ
एक कहानी हो
एक…… #कहानी…… हो…….

कवि- सतीश चोपड़ा

Author
सतीश चोपड़ा
नाम: सतीश चोपड़ा निवास स्थान: रोहतक, हरियाणा। कार्यक्षेत्र: हरियाणा शिक्षा विभाग में सामाजिक अध्ययन अध्यापक के पद पर कार्यरत्त। अध्यापन का 18 वर्ष का अनुभव। शैक्षणिक योग्यता: प्रभाकर, B. A. M.A. इतिहास, MBA, B. Ed साहित्य के प्रति विद्यालय समय... Read more
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