एक कवि का दर्द

आज की कविता कवि को समर्पित है
ज़रा दिल से पढना दोस्तों

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कवि दिल की तस्वीर को कागज पे उतारता है
अपने मन के भावों से, कविता को संवारता है
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लिखता है काटता है फिर लिखता है काटता है
खुद अपने ही लिखे में, फिर कमियां छांटता है
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कलम से कुछ गलत ना लिख जाए वो डरता है
एक चित्रकार की भांति कविता में रंग भरता है
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कविता कवि की आत्मा का एक हिस्सा होता है
हर शब्द में उसके जीवन का एक किस्सा होता है
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एक लेखक का जीवन बहुत बड़ा त्याग होता है
ये कविताएं लिखना राग नही बड़ा वैराग होता है
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एक कवि की जागीर बस उसके शब्दों के मोती है
बस थोड़ी वाह वाह ही एक कवि की पेमैंट होती है
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छंद को मिलाना कोई बच्चों का खेल नहीं होता है
एक कवि जीवन की लड़ाई में, फेल नहीं होता है
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कवि बेचारे शोषण से, बहुत मजबूर हो जाते हैं
कवि से रिस्ते नाते भाई बंद सब ही दूर हो जाते हैं
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एक गीतकार ही एक गायक का आधार होता है
फिर भी उनकी नज़रो में बिल्कुल बेकार होता है
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कोई क्या जाने इसमें कितनी माथाखोरी होती है
दिल बडा दुखता है, जब कविताएं चोरी होती है
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इतनी मेहनत के बाद भी कविता वेस्ट हो जाती है
डालने की देर नहीं होती, कोपी पेस्ट हो जाती है
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कविता चोरी कर सकते हो कवि का दिमाग नहीं
आजाद मंडौरी लिखने की ठंडी होती आग नहीं

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