Jul 8, 2016 · मुक्तक
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एक उडान बाकि है अभी!!

इस तरह हमनें न कोई रिश्ता बनाना चाहा !
जिस तरह तुमने हमसे निभाना चाहा !
आजा़द कर दिया मैंने परिन्दे को !
जब देखा फड़फड़ाते परों ने उड़ना चाहा!
ज्योतिमा

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jyotima shukla
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मैं काव्य का सृजन उतने ही मन से करती हूँ जितना एक ऋषि अपनी साधना!!... View full profile
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