Aug 22, 2016 · कविता

एकाकीपन

एकाकी पन …….

आजकल एक चिडियॉ मुंडेर पर चहकती है
कभी ऑगन मे कभी बरंडे पर फुदकती है

गौर से देखा तो गाभिन पछी थी
तिनका तिनका जोड कर नीड रजती थी

बिन नर पछी के स्वयं कितनी सछम थी
स्वयं सेवी एवं संवयं संगठित थी

कुछ ही दिनो मे अंडो को सेते देखा
फिर नन्हे पंरिंदो के साथ चहकते देखा

आज चिडिया परिंदो के साथ उडान भर रही थी
उनके पंखो को परवाज दे रही थी

परिंदो ने भी अपना मकाम चुन लिया था
अपना आसमान अपना आयाम चुन लिया था

आज फिर चिडिया को नीड के पास देखा
अजब नीरवता का एहसास देखा

कुछ ……बहुत कुछ अपने सा जुडाव देखा
परिंदो के जाने क् बाद ……

क्या ! ये भी नीरवता का दर्द सहती है ?
मेरी तरह क्या ये भी एकाकी पन का दर्द सहती है

नीरा रानी
…………………
गाभिन ..,pregnant
नीड …nest
परवाज…lnspire
आयाम ..destination
नीरवता ..loneliness

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साधारण सी ग्रहणी हूं ..इलाहाबाद युनिवर्सिटी से अंग्रेजी मे स्नातक हूं .बस भावनाओ मे भीगे...
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