Oct 16, 2016 · गीत
Reading time: 1 minute

एकता के गीत गायेंं, हो परस्पर प्यार इतना( गीत)पोस्ट २९

एकता के गीत गायें
****************
हम रचाने आ गये संसार फिर स्वप्निल धरा पर
हो परस्पर प्यार इतना एकता के गीत गायें ।।

सत्यता हो मूल्य शाश्वत , हो समय स्वर्णिम सबेरा
दूर हो तिमिरांध जग का ,हो भले कितना घनेरा
हम मधुर संगीत के सँग नित् नवल गायें ऋचाएँ
हो परस्पर प्यार इतना एकता के गीत गायें ।।

भूल कर बातें वििगत की, छोड़ कर सारे फसाने
एक क्या अनगिन धरा पर सूर्य हैं हमको उगाने ।
दूर हो पतझरनुमा संत्रास यह मधुमास लायें ।
हो परस्पर प्यार इतना एकता के गीत गायें ।।
—– जितेंद्रकमलआनंद

1 Comment · 222 Views
Copy link to share
Jitendra Anand
150 Posts · 1.9k Views
Follow 1 Follower
हम जितेंद्र कमल आनंद को यह साहित्य पीडिया पसंद हैं , हमने इसलिए स्वरचित ११४... View full profile
You may also like: