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ऋतु बसंत की जब है आती

बसंत कुमार शर्मा

बसंत कुमार शर्मा

गज़ल/गीतिका

February 2, 2017

ऋतु बसंत की जब है आती
कली कली दिल की खिल जाती

फूल खिले हैं रंग बिरंगे,
तोड़ रहीं हैं कलियाँ बंधन
यहाँ वहां सारी बगिया में,
करते फिरते भँवरे गुंजन

कहीं नाचता मोर कहीं पर,
गीत प्रेम के कोयल गाती

पंछी छोड़ घोंसला निकले,
दिल में छायी हुई उमंगें.
आसमान में नीली पीली,
नाच रही हैं खूब पतंगें.

आम लगे हैं अब बौराने,
अमियाँ सुधि मुंह पानी लाती

Author
बसंत कुमार शर्मा
भारतीय रेल यातायात सेवा (IRTS) में , जबलपुर, पश्चिम मध्य रेल पर उप मुख्य परिचालन प्रबंधक के पद पर कार्यरत, गीत, गजल/गीतिका, दोहे, लघुकथा एवं व्यंग्य लेखन
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