मनुज विश्व-मल ढो रहा, बनकर जगत्-कहार /गाँव सुविकसित तभी जब क्षरे हृदय-मल-चूल

बेशर्मी की नाक बन ,फैला भ्रष्टाचार|
मनुज विश्व -मल ढो रहा, बनकर जगत् -कहार|

कैसे राष्ट्र-प्रसन्नता, का फूलेगा फूल ?
गाँव सुविकसित तभी जब,क्षरे हृदय-मल-चूल|

बृजेश कुमार नायक
जागा हिंदुस्तान चाहिए एवं क्रौंच सुऋषि आलोक कृतियों के प्रणेता
08-04-2017

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