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*** उड़ान ***

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

मुक्तक

October 9, 2017

उड़ान का क्या कहना पंछी

कब अपनी हार मानता पंछी

मुड़ – मुड़ कर कब देखता वो

घोंसला अपना उड़ान का पंछी।।

?मधुप बैरागी

हर्जाना हो चाहे मरजाना हो उससे पहले ही

बस नानुकुर कर मुस्कुराकर मुकरजाना हो ।।

?मधुप बैरागी

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Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल 13.7.2017 स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना... Read more

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