.
Skip to content

उस लम्हा

विनोद कुमार दवे

विनोद कुमार दवे

गज़ल/गीतिका

November 9, 2016

उस लम्हा काश हम थोड़ा ठहर गए होते,
जब तेरे दिल में उतर जाना चाहते थे।
**
हमने इतने इत्मीनान से उन्हें खो दिया,
जितने होश से वो हमे पाना चाहते थे।
**
हमें याद नही आई तुम्हारी,
तुम भी हमे भुलाना चाहते थे।
**
ठुकराए जाने के बावजूद,
तेरे ही दर पर आना चाहते थे।
**
अँधेरा था बहुत मेरी जिंदगी में,
तेरे दिल में कोई जोत जालना चाहते थे।

Author
विनोद कुमार दवे
परिचय - जन्म: १४ नवम्बर १९९० शिक्षा= स्नातकोत्तर (भौतिक विज्ञान एवम् हिंदी), नेट, बी.एड. साहित्य जगत में नव प्रवेश। पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।अंतर्जाल पर विभिन्न वेब पत्रिकाओं पर निरन्तर सक्रिय। 4 साझा संकलन प्रकाशित एवं 17 साझा संकलन प्रकाशन... Read more
Recommended Posts
☀ *बताना चाहते है*?
Sonu Jain कविता Oct 26, 2017
☀ *बताना चाहते है*? राज ए दिल बताना चाहते है;; उनको हमराज बनाना चाहते है;; दिले बाग मे पौधा गुलाब सजाना चाहते है;; जिंदगी को... Read more
गुज़रता रहा लम्हा-लम्हा....
गुज़रता रहा लम्हा-लम्हा ढलता रहा लम्हा-लम्हा ज़िंदगी चाहे थम सी गई थी चलता रहा लम्हा-लम्हा समय के साथ चलता रहा पहर-पहर,लम्हा-लम्हा शब हुई दीपक जले... Read more
चाहते है
सभी रिश्ते निभाना चाहते है तुझे अपना बनाना चाहते कदम तेरा हमेशा हो सही ही नया दीपक अब दिखाना चाहते है सभी की जिन्दगी हो... Read more
तेरी याराना पसंद है |ग़ज़ल|
मुस्कुरा कर दर्दे दिल छूपाना पसंद है तुम्हें तो दिल जलाकर बहलाना पसंद है देखना चाहते है तेरे चेहरे पर मुस्कान ज़िंदगी से तेरे हर... Read more