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उस बेवफ़ा की तरह

विनोद कुमार दवे

विनोद कुमार दवे

शेर

September 7, 2016

ये वक़्त भी गुजर गया बातोँ बातोँ मेँ,,,,,,,,,
दुरियाँ बदल न सकी मुलाकातो मेँ,,,,,,,,,
बिजलियोँ को छूने की तमन्ना सी जगी हैँ……….
यहाँ सिर्फ धुआँ हैँ तो आग कहाँ लगी हैँ……….
**** ******

चला जाऊंगा तेरी जिंदगी से ये पहचान छोड़कर,
तेरे टूटे हुए सपनो में मेरे निशान छोड़कर।
**** *****
लौट आने का दिल करे तो आ जाना मेरे हमदर्द,
मैं तो वहीं खड़ा हूँ जहाँ तुमने छोड़ा था………..
***** *******
कोई तो रोको इस बेदर्द मौसम को,
ये भी चला जाएगा उस बेवफा की तरह।
***** ******

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Author
विनोद कुमार दवे
परिचय - जन्म: १४ नवम्बर १९९० शिक्षा= स्नातकोत्तर (भौतिक विज्ञान एवम् हिंदी), नेट, बी.एड. साहित्य जगत में नव प्रवेश। पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।अंतर्जाल पर विभिन्न वेब पत्रिकाओं पर निरन्तर सक्रिय। 4 साझा संकलन प्रकाशित एवं 17 साझा संकलन प्रकाशन... Read more

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