उस चाँद की तलाश में

होगी कोई हमारी भी प्रेम कहानी ,
बस इसी की आस में ।
मैं चल पड़ा इस सफर पर तन्हा ,
उस चाँद की तलाश में ।।

कब तलक रहोगे तुम हमसे दुर अवकाश में,
रहो ना तुम मेरी हर एक अनुभूति अहसास में ।
बस इतना ही माँगु मैं रब से ,
मेरी चाँद का ही नाम लिखा हो मेरी हर साँस में ॥

होगी कोई हमारी भी प्रेम कहानी ,
बस इसी की आस में ।
मैं चल पड़ा इस सफर पर तन्हा ,
उस चाँद की तलाश में ।।

-दिवाकर महतो
बुण्डू, राँची, झारखण्ड

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