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उसे पाने की खातिर….

प्रतापसिंह ठाकुर(राणा)

प्रतापसिंह ठाकुर(राणा)

गज़ल/गीतिका

February 11, 2018

उसे पाने की ख़ातिर क्या कुछ नहीं किया मैंने
दिन को उसे देखते रहे रातों को सोचा मैंने
निगाहें बस देखते रहना चाहती थी सिर्फ उन्हें
उनकी तस्वीर को दिल में ही बसाया मैने
मेरे नसीब में शायद उसका प्यार न लिखा था
नाहक ही चैनों सुकूँ अपना गवायां मैंने
प्यार की मज़बूरी ही कुछ ऐसी थी ठाकुर
उसके सिवा सबको भुलाया मैंने
उसे तो मेरी फ़िक्र थी ही नहीं कभी
फ़िक्र करके उनकी अपना दिल जलाया मैंने

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Author
प्रतापसिंह ठाकुर(राणा)
From: सनावद
अध्यापक(विज्ञान ) मध्यप्रदेश
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