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उसे गुरूर है

विनोद कुमार दवे

विनोद कुमार दवे

शेर

September 24, 2016

उसे गुरूर है अपने चेहरे की मासूमियत पर
उसने मेरी आँखों की गहराई नहीं देखी।
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जिनका हर इक आंसू मैंने मोती की तरह संभाल रखा था,
उनसे गुजारिश है मुझे मेरी मुस्कान लौट दे।
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जो शख्स प्यार करता है,वो याद नही आता
वो ही याद आता है, जो प्यार नहीं करता।
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एक आरज़ू, एक तलाश एक ही इंतजार है
कभी वो भी कहे, मुझे तुमसे प्यार है।
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ज़रा सी याद क्या आती है तुम्हारी जुल्फ़े
बादलों को अपना रंग फीका लगता है।
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तन्हाई और ये बैरी इंतजार,
न ख़ुद ख़त्म होंगे न मुझे ख़त्म होने देंगे।
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बस ये ही सोचकर छू ली हमने बारिश की बूंदें
उन्हें भी यो भिगोया होगा इस बारिश ने कहीं न कहीं।
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Author
विनोद कुमार दवे
परिचय - जन्म: १४ नवम्बर १९९० शिक्षा= स्नातकोत्तर (भौतिक विज्ञान एवम् हिंदी), नेट, बी.एड. साहित्य जगत में नव प्रवेश। पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।अंतर्जाल पर विभिन्न वेब पत्रिकाओं पर निरन्तर सक्रिय। 4 साझा संकलन प्रकाशित एवं 17 साझा संकलन प्रकाशन... Read more
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