गीत · Reading time: 1 minute

उसको पाने की हसरत

उसको पाने के हँसी ख्वाबों को पाले बैठा हूँ;
आजकल मैं बड़ी कशमकश में रहता हूँ।

दिल को कितना समझाता हूँ;
पर राजी नहीं कुछ मानने के लिए,
अक्सर उसी के ख्यालों में खोया रहता हूँ।

उसकी मुस्कराने की अदा गजब-कातिलाना है;
उसके हंसी चेहरे को यादों में बसाए रहता हूँ।

चाहता हूं मैं ही शुरू करूँ;
इस पाक रिश्ता-ए-मोहब्बत को,
इसी उलझन में ही खुद ही उलझा रहता हूँ।

जब जब नजरों को उनकी नजरों से टकराया हूँ;
लाजमी है कि खुद ही खुद में मैं शरमाया हूँ।

रोज ही अपने दिल की दीवारों पर;
नाम उसका लिख लिख के मिटाया हूँ।

उसकी हर फ़ितरत का दिल दीवाना हो गया;
फिर भी राज अपने दिल का उससे हर बार छिपाया हूँ।

उससे कैसे कहूँ ‘निश्छल’अपने दिल की हकीकत;
बड़ी उहापोह में आजकल जीता हूँ।

By-ANIL KUMAR “निश्छल”

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