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उलझन

pratik jangid

pratik jangid

कविता

March 30, 2017

मेरी बातो को इस कदर ना समझना की मे तुमको उलझा रहा हु । बस इतना समझ लेना खुद उलझा हुआ हु। तो खुद को सुलझा रहा हु ……।।

Author
pratik jangid
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