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उर्मिला

Rita Yadav

Rita Yadav

कविता

July 1, 2017

पलकन अश्रुवन,
धीमी गति धड़कन,

विरह व्यथा सहन कर तड़पन,
लक्ष्मण को विदा कर वन,

उर्मिला धूमिल कर निज मन ,
बैठ भवन में याद करे बिछड़न,

शेष दिन चौदह वर्ष मे कितने,
गिन दिन रैन बिताती,

अविरल प्रिय पथ ,अथक निहारत ,,
बैठ झरोखे से देखे उपवन ,
लक्ष्मण कही न पाती,

नहीं कोई तार , नहीं कोई पाती,
चौदह वर्ष यूं ही बिताती,,

रीता यादव

Author
Rita Yadav
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