उम्मीद

रात के बाद
सुबह आएगी
ग़म के बाद
आएगी खुशी
है सभी लोग
इसी उम्मीद में ।।

वो पतंगा भी
शोलों पर कुर्बान
हो जाता है
उसे पाने की
उम्मीद में ।।

वो प्रेमी भी
सारा दिन खड़े
रहता है गली में
अपनी दिलरुबा
के एक पल के
लिए दीदार की
उम्मीद में ।।

पूरे वर्ष बहुत
मेहनत करता है
हर छात्र भी
परीक्षा में अच्छा
स्थान पाने की
उम्मीद में ।।

वृद्धाश्रम में सबकी
नज़रें एक टक
दरवाज़े को
निहारती रहती है
किसी अपने की
उम्मीद में ।।

गर्मी से बेहाल
अपने खेतों में
काम करने वाला
अन्नदाता भी तो
रहता है बारिश की
उम्मीद में ।।

कुछ भी हो जाए
कैसी भी विपदा आए
उम्मीद कभी नहीं
छोड़ें क्योंकि ये
जिंदगी चल ही रही है
किसी ना किसी
उम्मीद में।।

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मैं एक कविता का विद्यार्थी हूं । सामान्य भाषा, जो आम लोगों को समझ आए,...
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