कविता · Reading time: 1 minute

उम्मीद की किरण

हर दिन एक नई उम्मीद की किरण है,
हर रात के अंधेरे के बाद एक नया सवेरा है।

हर कदम एक नई चुनौती है,
जो संभल गया उसके जीवन में खुशहाली है,
जो डगमगा गया जीवन पथ पर,
फिर वो ना जीवन की कसौटी पर खरा उतरता है।

हर दिन एक नई उम्मीद की किरण है,
हर रात के अंधेरे के बाद एक नया सवेरा है।

जो तुनें बोया था, देख वहीं तुं आज काट रहा है,
अपनी मैं से कभी बाहर न आया था,
देख आज वही दुसरों की मैं में हां-हां कर रहा है।

हर पल तय है, न मैं बदल सका,
ना ही गुरू तुं बदल पाएगा,

हर दिन एक नई उम्मीद की किरण है,
हर रात के अंधेरे के बाद एक नया सवेरा है।

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