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उन बिन, अँखियों से टपका जल

बृजेश कुमार नायक

बृजेश कुमार नायक

गज़ल/गीतिका

April 7, 2017

उन बिन,अँखियों से टपका जल
अमल कपोलों पर अटका जल

घन गरजे , चमकी बिजली तो
झटका लगा, हृदय खटका जल

आई आहट ,आँख गढ़ गई
मुस्काया, उरमय घट का जल

कोउ और है,पुनः करुण रस
रूपी मन बन ,पुनि भटका जल

सारी रात, जागते बीती
तरस गए दृग- घूँघट-काजल

कांहा तेरी चतुर चाल से
विवस हुई, मन पिय- घट का जल

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता

Author
बृजेश कुमार नायक
एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा जन्मतिथि-08-05-1961 प्रकाशित कृतियाँ-"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" साक्षात्कार,युद्धरतआमआदमी सहित देश की कई प्रतिष्ठित पत्र- पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेक सम्मानों एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित, जन्म स्थान-कैथेरी,जालौन निवास-सुभाष नगर,... Read more
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