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उन्हें भुलाऊंगा कैसे

अपनी सांसों को दिल से
मैं अलग करूंगा कैसे
जो छोड़ गए है मुझको
उन्हें अब भुलाऊंगा कैसे।।

जो दर्द दिल में दे गए
उनको भुलाऊँगा कैसे
रिश्ता ये नफरतों का
अब मैं निभाऊंगा कैसे।।

उसने तो दो पल में छोड़ दिया
मैं एक एक पल बिताऊंगा कैसे
नासूर बन रहे है जो ये ज़ख्म मेरे
दर्द इनका अब मैं सह पाऊंगा कैसे।।

मुड़कर भी न देखा उसने
इतना पत्थर हो गया वो कैसे
सोच में डूबा रहता हूं मैं, मुझे
इतनी जल्दी भूल गया वो कैसे।।

मुझे तो नींद नहीं आती अब
चैन से सोता होगा वो कैसे
कभी रोता तो वो भी होगा, फिर
आंसुओं को छुपाता होगा वो कैसे।।

किए थे मुझसे जो उन वादों
को, भूल गया होगा वो कैसे
मरता था उसकी हर अदा पर मैं
ये भी याद रहा न होगा कैसे।।

मैंने तो मांगी थी उसकी खुशियां,
दी खुदा ने, समझूं मैं ये न कैसे
मिल जाए उसे मुझसे बेहतर कोई
ये दुआ उसके लिए मैं करूं न कैसे।।

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Author
कवि एवम विचारक
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