उनकी बाहों का सहारा

उनकी बाहों का सहारा नसीब हो, तो क्या हो
बीच मझधार में किनारा नसीब हो, तो क्या हो
उन खुशगंवार लम्हों का सहारा हो, तो क्या हो
तनहा रातों में तेरे आलिंगन का सहारा हो, तो क्या हो

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मैं अनिल कुमार गुप्ता , शिक्षक के पद पर कार्यरत हूँ मुझे कवितायें लिखने ,...
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