कविता · Reading time: 1 minute

“”उत्सव”” उमंग का है आया!!!

खुशियां लाया ,खुशियां लाया।
“उत्सव” उमंग का है आया ।
खुले गगन में उड़ी पतंगे,
हर्ष सभी के मन में छाया।।
गुड़ में किसी ने तिल मिलाया।
दिल वालों ने दिल का मेल मिटाया।
मुंडेर मुंडेर पर देखो आज तो,
हुजूम सारा उमड़ आया।।
संक्रांति में क्रांति शुभ आई।
धरती भी आज हर्षाई।
झूम झूम कर सबने,
मकर सक्रांति त्योहार मनाया।।
देव, सूर्य भी आज से देखो
उत्तरायण में आए।
राशियों के समूह में से ,
प्रवेश मकर राशि में पाए।
प्रांत प्रांत देश में मेरे,
परंपराओं को सबने ही निभाया।
मकर सक्रांति का पावन पर्व जो आया।।
प्रकृति रंग अब बदलेगी,
बसंत से धरा महकेगी।
जीवन की डोर अनुनय यो ही बनी रहे
उन्मुक्त गगन में पतंगे उड़ती रहे
उमंग तरंगों की दुनिया,
मन के भाव यही कहे यही कहे।।
राजेश व्यास अनुनय

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